VSK ऐप का सर्वर हुआ क्रैश, शिक्षक नहीं लगा पाए हाजिरी! संजय शर्मा ने की, VSK ऐप से उपस्थिति बंद कर बायोमैट्रिक मशीन लगाने की मांग

रायपुर 16 जून 2026। 16 जून से प्रदेश में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत तो हो गई, लेकिन पहले ही दिन स्कूल शिक्षा विभाग की डिजिटल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। विभाग द्वारा शिक्षकों के लिए जारी वीएसके एप (विद्या समीक्षा केंद्र) का सर्वर क्रैश होने के कारण प्रदेश के शिक्षक अपनी ऑनलाइन हाजिरी दर्ज नहीं करा सके। शिक्षक घंटों तक एप पर लॉगिन करने के लिए परेशान होते रहे, जिससे स्कूलों में शिक्षण कार्य भी प्रभावित हुआ।
शिक्षा विभाग के आदेशानुसार शिक्षकों को सुबह 10:00 बजे ‘चेक-इन’ और शाम 4:00 बजे ‘चेक-आउट’ करना अनिवार्य है, जिसके बाद ही उनकी पूरे दिन की उपस्थिति मानी जाएगी। लेकिन धरातल पर विभाग का यह सॉफ्टवेयर पूरी तरह फेल साबित हो रहा है।
पहले ही दिन फेल हुआ सिस्टम, शिक्षक रहे परेशान
आज 16 जून को जब प्रदेश भर के शिक्षकों ने सुबह 10:00 बजे स्कूल पहुँचकर VSK ऐप के माध्यम से चेक-इन करने का प्रयास किया, तो अधिकांश शिक्षकों का चेक-इन ही नहीं हुआ। ऐप का सर्वर डाउन होने और सॉफ्टवेयर बेहद कमजोर होने के कारण शिक्षक घंटो मोबाइल लेकर परेशान होते रहे। इस तकनीकी विफलता के कारण कई कर्तव्यनिष्ठ शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी, जिससे उनमें भारी आक्रोश है।
निजी मोबाइल का उपयोग: निजता का हनन और डेटा लीक का खतरा
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने इस व्यवस्था पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि “शिक्षकों के निजी मोबाइल फोन का उपयोग सरकारी उपस्थिति के लिए अनिवार्य करना उनके मौलिक अधिकारों और निजता (Privacy) का सीधा हनन है। इस ऐप के माध्यम से शिक्षकों का निजी डेटा लीक होने का खतरा लगातार बना हुआ है, जिसकी सुरक्षा की कोई गारंटी विभाग के पास नहीं है।
बायोमैट्रिक मशीन से उपस्थिति लेने की मांग
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, वाजिद खान, प्रदेश उपाध्यक्ष देवनाथ साहू, बसंत चतुर्वेदी, प्रवीण श्रीवास्तव, शैलेन्द्र यदु, कोमल वैष्णव, मुकेश मुदलियार, प्रदेश सचिव मनोज सनाढ्य, प्रदेश कोषाध्यक्ष शैलेन्द्र पारिक ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि: VSK ऐप के माध्यम से ली जा रही इस व्यावहारिक और दोषपूर्ण उपस्थिति व्यवस्था को तत्काल बंद किया जाए।
निजी मोबाइल के बजाय सभी स्कूलों में शासकीय खर्च पर बायोमैट्रिक (Biometric) मशीनें स्थापित की जाएं, ताकि पारदर्शी और गरिमापूर्ण तरीके से उपस्थिति दर्ज हो सके।
टीचर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस कमजोर सॉफ्टवेयर और निजता विरोधी व्यवस्था को वापस नहीं लिया गया, तो शिक्षक समाज उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।












